कविता

बस अब मेरी कविता ही ज़रिया है शायद,
तुझ से बात करने का,
वरना आज कल ख़्वाबों में भी कहाँ आता है तू,
यूँ ही नहीं भूलने लगा हूँ तुझे,
हर पल की कोशिश का नतीजा है यह,

मैं तो कब का भूल चुका हूं,
पर यह पंक्तियाँ है कुछ,
जो तुम्हें याद रखती हैं बस,
कुछ अधूरे ख़्वाब है,
और है कुछ अरमान,
जो ना पूरे हुए और ना निकले,

यह बस कविता ही है,
जो पकड़ कर मेरा हाथ,
ले जाते हैं उन गलियों में,
जहां कभी तुम थी,
और था तुम्हारा साथ,

था तेरी काजल का अंधेरा,
और था तेरे होठों का उजाला,
वो आँखे थी, जहां था मेरे रूह का ठिकाना,
और था तेरी जुल्फों का साया,
जहाँ गुज़र जाती थी मेरी शाम,

और है कुछ छोटे-छोटे लम्हे,
जिनमें होती थी बहुत सारी बातें,
और उन बातों में हमारे आने वाले समय की तैयारी,

सब तय हुआ था,
कितने कमरे होंगे,
कमरों का रंग कौनसा होगा,
रात का छोड़ा झगड़ा, सुबह कहाँ से शुरु होगा,

यह भी तय हुआ था,
हर बार मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा,
और ना हर बार तुम मनाओगी,
हमारी लड़की होगी,
उसकी आँखें मुझपर,
और होठ तुम्हारे जैसे होंगे,

कई कसमें वादे भी किये थे,
नहीं भूलने के और ना भुलाने के,
साथ जीने के और साथ मरने के,

आज सोचता हूँ तो हसीं आती है,
क्यूंकि पता तो था उस दिन भी सब,
सपने ही तो थे जो कभी पूरे नहीं होने थे,

पर यह कविता है,
जो आज भी सब सच मानती हैं,
जब भी मुझे अकेला पाती है,
ले जाती हैं उन्हीं याद की गलियों में,
जहाँ हम फिर से मिलते है,
घंटों बात करते हैं,
और रहते है साथ- साथ…!!

~ अंकुश ~

कुछ यादें है तुम्हारी..!!

कुछ यादें है तुम्हारी,
जो वक़्त बे वक़्त दस्तक देती है मेरी दरवाजे पर..
मिन्नतें हर बार करता हु,
न वापस लौट कर आने की,
पर कहाँ मानती ये मेरा कहना…
श्याद तुम्हारी ही तरह जिद्दी है..
आती है बिन बुलाये…
शायद इन्हे पता है मेरे दिल का हाल,

आती है….कुछ पल साथ बिताती है…
रूकती नही कभी भी…
शायद वक़्त कम है इनके पास..
कभी सुख की, कभी दुःख की..
कभी आँखों मैं आँसू,
और कभी होठों पर एक मुस्कान छोड़ कर जाती है..
शायद तुम्हारी ही तरह पागल है..

मालूम है इन्हे,
कि तुम नहीं आओगी,
चाह कर भी, नहीं बुलाओगी…
जानते हुए भी, सब छुपाओगी..
जान बूझ कर मुझे सताओगी.
कम यह भी नहीं है तुमसे…
परेशान यह भी करेगी..

कानो मैं कुछ तोह बुदबुदायेंगी,
पुरानी कोई बात फिर से बतायेंगी,
रख कर सर को कभी, सोया था तेरी गोद मैं,
वही एहसास फिर से करवाएंगी…
यादें है तुम्हारी सुरभि…
मेरे जाने से पहले भला, मुझे छोड़ कर कैसे जाएँगी..!!

~ अंकुश ~

उन्मुक्त आकाश की तलाश

हाँ उस आकाश की तलाश है..
जिसके तले सकारत्मकता का प्रकाश है…
जहाँ सिर्फ कागजों में नहीं..
वास्तविकता में हो रहा विकास हो..

जहाँ कल्पनाये सिर्फ सपने नहीं…
सपने सच मैं लेतें आकार हो..
हाँ, मुझे उससे आकाश की तलाश है..

उन्नति का शोर नहीं..
पर्यावरण से कोई बैर नहीं..
हर किसी को प्रकृति से प्यार हो..
हाँ, मुझे उस आकाश की तलाश है…

जहाँ खोना किसी के लिए पाना हो…
कम बहुत ज्यादा हो…
प्यार आपस में बेशुमार हो…
हाँ, मुझे उस आकाश की तलाश है..

जहाँ न हो विवाद सीमा का..
और न जंग में कोई खोता अपना लाल हो.
मांग सूनी न होती हो…
और बच्चा कोई अनाथ न हो..
हाँ, मुझे उस आकाश की तलाश है..

सोये न भूखा कोई बेरोज़गार से…
उस स्वराज की तलाश है..
कोई ऊँचा कोई नीचा न हो…
जाती किसी की योग्यता का आधार न हो..
सबको जहाँ बराबर अवसर मिले…
हाँ, मुझे उस आकाश की तलाश है..

एक दूसरे के कंधे पर चढ़ कर नहीं..
हाथ पकड़ कर आगे बढ़ने का विचार हो..
आपस में सदभावना और सदाचार हो..
हाँ, उस आकाश की मुझे तलाश है..

धर्म किसी को बांटने का हथ्यार न हो..
नेताओं के वादे सिर्फ बातें न हो…
सवाल पूछना हर किसी का अधिकार हो..
हाँ, मुझे उस आकाश की तलाश है..

तुम मुझ से कुछ कह सको..
मैं तुमसे कुछ पूछ सकूं..
शिकवे शिकायत कर सकू..
दूरियां भी जहाँ..नज़दीकयां हो..
हाँ.मुझे उस आकाश की तलाश…
जिसके तले…हम उन्मुक्त हो कर जी सके..
हाँ मुझे उसी आकाश की तलाश है!!

~ अंकुश ~

उम्र के हर पडाव पर मैं बदल सा गया..!!

उम्र के हर पडाव पर मैं बदल सा गया,
कभी अच्छा, कभी बुरा, कभी झूठा और कभी सच्चा हो गया,
पहले बचपन, फिर जवानी और अब मैं उम्रदराज हो गया,
कभी औरों के करीब, तो कभी अपनों से दूर हो गया..!!

हर रिश्ते में, मैं बढ़ता चला गया,
धीरे-धीरे मैं जिंदगी की उलझनों में, मैं उलझता चला गया,
रोजमर्रा की भाग दौड़ में, मैं खुद को खोता चला गया,
उम्र खर्च होती गई और, जीना कैसे है? यह मैं भूलता चला गया..!!

कभी दोस्त मिले और कभी प्यार मिला,
पर समय के साथ सब, छुटता चला गया,
आधी उम्र गलती करने में,
और बाकी कि गलती को सुधारने में चला गया,
कुछ वक़्त शिकायतें करने में,
और कुछ शिकवे दूर करने में निकल गया…!!

कभी दूसरों को समझने में,
और कभी दूसरों को समझाने में उलझ गया,
खुद को भी समझना जरूरी होता है मैं यह भूल गया..!!

व्यवहारिकता ने मुझे जो मैं हूँ, वो ना रहने दिया,
अर्थ अर्जित की दौड़ में, मैं जीवन के अर्थ को खो दिया,
साँस भी कहाँ ली कभी फुर्सत से, चैन जाता गाया,
सब कुछ पाने की चाह में, बहुत कुछ बाकि रह गया,
इतना टूटा हूँ अब कि, खुद को समेटना रह गया,

उम्र के हर पडाव पर मैं बदल सा गया..!!

~ अंकुश ~

वो मुझसे छोटी है..!!

वो उम्र में मुझसे छोटी है,
रिश्तों का क्या है, जो चाहे नाम दे दो,
पर शायद वो मेरी, दोस्त सबसे अच्छी है,
सब जानना है उससे,
इसलिए सवाल बहुत जायदा है,
घंटो होती है उससे बातें,
आँखों मैं साथ कट जाती है रातें,
कौन कहता है की हमउम्र होते है हमसफ़र,
वो कम उम्र भी, समझता है मुझे बेहतर,
हाँ यह सच है, वो आदत सी हो गयी है,
पर सुकून उसके साथ मिलता है,
कहता हूँ उससे मैं सब कुछ बेजिझक,
क्यूंकि विभेद (जज) वो नही करती है,
कुछ खाव्ब सा है यह सब लेकिन,
टूटेगा एक दिन, उससे अपना रास्ता चुनना है,
कब तक रहेंगे एक दूसरे की आदत,
आज नही तोह कल बदलना है,
रहेगा याद यह सब पर हर लम्हा,
और होगी साथ शायद तुम भी,
मैं थोड़ी जल्दी और तुम थोड़ी देर से बूढ़ी हो जाओगी जब,
करेंगे बातें ऐसी ही, पर यह सब एक उम्मीद है,
पूरी शायद न भी हो, फिर भी गम नहीं,
जो मिला है भला वो क्या कम है…!!

~ अंकुश ~

बदलना होगा

हमें बदलना होगा..
एक दूसरे को समझना होगा..
जितनी है शिकायते..और गिले शिकवे…
हाँ…हमे यह सब पीछे छोड़ना होगा

कब तक साथ रह कर भी रहेंगे अकेले..
अब हमे इस चुप्पी को तोड़ना होगा..
हाँ…तुम्हे और मुझे..
हमे बदलना होगा..!!

हमसफ़र है मैं और तुम..
तो रास्ता भी एक ही चुनना होगा…
तुम थामो मुझे और मैं सँभालु तुम्हे…
हाँ…ऐसा ही करना होगा..

तुम मुझे और मैं तुम्हे कर दू माफ़..
इतना सा तो बस करना होगा..
हाँ…हमें बदलना होगा..!!

क्यों रहे हमारे सपने अलग..
अब एक ही खाव्ब बुनना होगा..
हाँ…हमें बदलना होगा..

हाँ मुझे खबर है…
यह सब इतना आसान नहीं..
पर साथ तुम्हे देना होगा..
हाँ..हमें बदलना होगा.. !!

~ अंकुश ~

छोटी सी बात

क्या याद है तुम्हे वो छोटी सी बात,
जब हम बैठे थे साथ साथ,
और तुमने कहा था यह लेकर हाथों में हाथ,
की पल दो पल नहीं, यह तो है जन्मों का साथ,

क्या रिश्ता इतना कमज़ोर था की,
चल भी नहीं पाए हम दो कदम भी एक साथ,
आज भी तेरी खुश्बू इन साँसों में है,
प्यार का वो मीठा एहसास जज़बातों में है,

फिर भी शिकवा नहीं है कोई भी तुमसे,
क्यूंकि दोष शायद मेरी किस्मत का है की,
भूल गयी तुम वो छोटी सी बात….!!

~ अंकुश ~

आप हमारी बॉस हैं..!!

आप को बताये भी तो कैसे बताये,
प्यार जताए भी तो कैसे जताए,
क्यूंकि आप हमारी बॉस हैं..!!

जी में आता है कि, खोल के रख दें हर राज़ दिल का,
और कह दे कि, आप कितनी अच्छी लगती है हमको,
पर कैसे कहें, क्यूंकि हम आपके सˈबॉडिनट्‌ है..!!

फ्खत सच इतना है कि,
लगती है हमको आप बहुत खूबसूरत,
पर कह दे यह सब ,नहीं दिखती ऐसी कोई सूरत..!!

अब हकीकत बताये भी तो कैसे,
कि आप बहुत नेक है औऱ लाखों में एक हैं,
है कहाँ इतना जिगर,
क्यूंकि आप है हमारे मैनेजर..!!

हर नाज़ नखरे उठाये जाते हैं आपके,
और कहते हैं कि…इट्‌स्‌ पाट्‌ ऑफ जॉब है,
हर अदा आपकी है हमको पसंद,
पर कमबख्त हमे हमारे, पिअरस से खौफ हैं..!!

सोचा एक दिन कह देंगे, ज्यादा हुआ तो नोटिस सर्व कर देंगे,
पर कह भी दें तो कैसे, आस-पास रहते हमारे कॉलीग्‌ हैं,
और हिम्मत भी तो होती नहीं हमारी,
क्यूंकि आप हमारी बॉस हैं..!!

~ अंकुश ~

अच्छा हुआ की तू चला गया..!!

अच्छा हुआ की तू चला गया,
क्यूंकि रेहना तेरा मेरी ज़िन्दगी मैं,
औरो के रहने पर भारी था,
चाहत तो थी मगर, दुश्वारियां भी थी,
प्यार तो था, पर शिकवे भी कम नहीं..!!

कमी तो है उस प्यार की आज भी,
पर बंदिशें नहीं अब तेरे हक़ की,
हाथों में हाथ तेरा न सही,
पर खो जाने का अब डर भी नही..!!

कंधे पर तेरे बेशक आज मेरा सर नहीं,
पर ये क्या कम है की,
आज सर रख कर रोने की कोई वजह नहीं,
तुझे वो सब दिया, जो दे सकती थी मैं,
पर हर चीज़ तेरी ज़िद बन जाये,
अब उसका खौफ नहीं..!!

रातें अब आँखों में कटती नहीं,
चैन से सोते है अब..
क्यूंकि सवाल जवाब की वो उलझन नहीं,
हर बात तेरे से शुरू होती थी..
अब अपने से हमे फुर्सत नहीं..!!

भूलने लगी थी अपनी पसंद नापसंद भी,
तू आया था जीवन मैं एक पड़ाव की तरह,
और मैं तुझे, अपनी मंजिल समझने लगी थी,
है आज एक ख़ामोशी सी,
क्यूंकि प्यार को वो अब शोर नहीं है,
हूँ अकेली आज पर अकेलापन नहीं है..!!

अच्छा हुआ की तू चला गया,
क्यूंकि अब मैं…मैं हूँ कोई और नहीं हूँ.!!!

~ अंकुश ~

ज़िन्दगी

जब भी मिलती हो परेशान करती हो,
पूछता हूँ कौन हो, तो जवाब से हैरान करती हो,
जीए जा रहा हूँ तुमको हर पल,
फिर भी खुद को ढूंढने पर मजबूर करती हो.!!

कदम कदम पर इम्तिहान करती हो,
मुश्किल कहा हो तुम पर,
जीना फिर भी कहा आसान करती हो तुम,
जितनी सुलझी हो, उतनी ही उलझने पैदा करती हो तुम..!!

हंसना-रोना, खोना-पाना, मिलना-बिछड़ना, प्यार-नफरत,
किसी एक रंग में कहा मिलती हो तुम,
हर एक मुलाकात में अलग सी दिखती हो तुम..!!

हर भीड़ में पहचान लेता हूँ तुमको,
पर पास औ तोह, बिलकुल अजनबी लगती हो तुम,
जितना ज्यादा समझ आती हो…उतनी ही नयी लगती हो तुम..!!

शिकवा नहीं है तुमसे फिर भी कोई,
क्यूंकि जो भी मिला, तुमसे ही मिला है.
ऐ “ज़िन्दगी” धुप मैं किसी साये सी लगती हो तुम,
जब भी मिलती हो…बहुत प्यार करती हो तुम..!!

~ अंकुश ~

अच्छा लगता है..!!

वो अपना हो या बेगाना अच्छा लगता है,
पल दो पल उसके साथ बिताना अच्छा लगता है,
कहने को जब मैं चाहूं, वो “हाँ” कह दे,
पर कहना उसका ना ना…अच्छा लगता है..!!

वो कहते-कहते अचानक रुक जाना उसका,
फिर अचानक से कुछ कह जाना उसका…अच्छा लगता है,
कहने को तो सब कह दूँ उसको,
पर अपने दिल मैं यह राज़ छुपाना..अच्छा लगता है..!!

वो हवाओं में जुल्फें बिखरना उसका,
फिर हवाओं से उलझी जुल्फों को सुलझाना उसका..अच्छा लगता है,
चाहूं तो आगे बढ़कर, उलझी जुल्फों को सुलझा सकता हूँ मैं भी,
पर सुलझाते-सुलझाते जुल्फों को खुद मैं उलझ जाना उसका..अच्छा लगता है..!!

वो ख़ामोशी से बहुत कुछ कह जाना उसका.
और मेरे बिना कुछ कहे ही, सब कुछ समझ जाना उसका..अच्छा लगता है,
मानने को तो मान लूँ मैं कि ये सब झूठ है,
लेकिन खुद को इस खाव्ब में उलझाए रखने कि..वो मेरी है,
अच्छा लगता है..!!

~ अंकुश ~

क्योंकि तु मेरा दोस्त है...!!

वैसे तो मैं तुझसे हर बात कहता हूँ,
और जो ना भी कहूँ तो क्या फर्क़ है,
क्यूंकि समझ तो तू वैसे भी लेता है,
तू पास रहें ना रहे, साथ तो तू वैसे ही रहता है,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

मिला था तू मुझे मेरे उन दिनों में,
जब कोई मेरे साथ ना था,
वो आखिरी दिन था मेरे अकेलेपन का,
अब तेरी दोस्ती मेरे साथ है,
ग़म नहीं कोई भी अब है,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

याद है तुझे वो EMU में लटक कर कॉलेज जाना,
साथ में कैन्टीन में समोसे और डोसे खाना,
या फिर vanky जा कर वाडा sambhar शेयर करना,
घंटों ट्रेन का इंतजार करना,
ओखला स्टेशन पर ब्रेड पकौड़े और कोल्ड ड्रिंक पीना,
तेरे मेरे सामने जो भी आये,
उसकी ले लेना, वो 427 में स्टाफ चलाना,
वजह बेवजह मैगी के अड्डे पर पड़े रहना,

तू कृष्ण और मैं सुदामा,
हाँ ठीक है, ऐसे मत देख,
कुछ मामलों मैं कृष्ण,
और तू सुदामा था,
पर वक़्त जैसा भी था,
मैं वीरू और तू जय था,
रहेंगे साथ हमेशा, यह वादा है,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

हास्टल के झगड़े, वो प्यार के रगड़े,
सब हमने झेले, कभी गुस्सा तो कभी ख़फ़ा,
पर हुए नहीं हम कभी दिल से जुदा,
दिन बदले, साल बदले,
नहीं बदले तो, बस हमारे दोस्ती के हाल,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

एक वो भी दौर था,
जब मैं अपनों से दूर था,
तू फिर भी उनके करीब था,
वक़्त वो भी गुजर गया,
सब कुछ ठीक हो गया,
अब मैं अपनों के बीच हूँ,
और इन सब की वज़ह तू है,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

वो साथ साथ कितने ही एडवेंचर किये है,
कभी राफ्टिंग में, तो कभी साथ में पी के गिरे है,
कभी-कभी नशे में, सिनेमा हॉल में भिड़े है,
कभी-कभी पहाड़ों पर, चांद के पीछे पीछे,
बस यूँ ही चले है, घंटों बाँटे सुख और दुख हैँ,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

स्कूटी पर बारिश मैं घंटों भीगे हैं,
कभी रातों को जलेबी, तो कभी आइस क्रीम खाने,
हम अपने घरों से कई बार निकले है,
हर सुख दुख बाँटे हैं,
वो पल जिसमें कुछ खोया था हमने,
और वो भी क्षण, जब कुछ मिला था,
सब एक साथ देखे हैं,
क्योंकि तु मेरा दोस्त है…!!

उम्र कम पड़ जाएगी तेरी मेरी कहानी कहने में,
पर यह सब ऐसे ही चलता रहे, इतनी सी बस दुआ है,
कमी नहीं मुझ किसी बात की है,
क्यूंकि उम्र के इस पडाव में भी, तू मेरे साथ है,
अब और कुछ चाहत नहीं है,
क्यूंकि तू मेरा दोस्त है…!!

~ अंकुश ~